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इस्लाम मे शराब

जब भी शराब को गलत कहा जाता हैं या शराब गाज़ा भांग जैसे नशे को हराम बताया जाता है तो कुछ हमारे  गैर मुस्लिम भाई हम पर  तंज़ मारते हैं और कहते है  अल्लाह जो जन्नत में शराब देगा  उसका  क्या” कुछ लोग ऐसा अपने अज्ञानता के कारण और भाषा की सही ज्ञान ना होने के कारण बोलते है  तो कुछ लोग जान बूझ कर अपनी हठधर्मी के कारण या फिर सुनी सुनाई बातो के कारण बोलते है।  Ratan Vishwakarma ji भाई शराब दुनिया में भी हराम और जन्नत में भी हराम है उत्तर~सबसे पहले ये विश्लेषण करना जरुरी है के कुरआन  में अल्लाह  ने दुनिया में शराब को क्यों हराम (वर्जित) किया है और क्या जन्नत में इसी शराब को पिलाने का वादा  किया है ?? जन्नत उन ईमान वालो अल्लाह परमेश्वर में विश्वाश रखने वालो के लिए हैं जो दुनिया में अपनी ज़िन्दगी अल्लाह परमेश्वर के हुक्म और फरमाबरदारी में गुजारते हैं और अपने रब के द्वारा मिलने वाली नेमतों पर विश्वाश रखते हैं वो हर बुरे काम से बचते हैं अच्छाई के रास्तो पर चलते है अच्छाई की दावत देते है वो जानते हैं उनका रब इसका बेहतर बदला इस दुनिया के बाद वाली ज़िन्दगी म...

सुरः तौबा

आज कल एक ट्रेड चला है ex muslim बन कर लोगो को भर्मित करने का लेकिन जब इनसे सवाल किया जाता है की क्या आप यह एक्सेप्ट करते हो की आप किसी मुस्लिम का ही औलाद हो किसी मुस्लिम के वीर्य से ही पैदा हुवे हो तो इनका कोई जवाब नही आता है बल्कि अपनी असल संस्कार दिखाने लगते है पोस्ट से तो ये भाई पूरी तरह नफरती संघी मानसिक्ता वाले लग रहे है लेकिन मुस्लिमो को अपना बाप बनाना भी तो जरुरी है क्यों की मुस्लिम इस्लाम के बिना तो इनकी ना सुबह होती है न साम  खैर अब चलते है इनके द्वारा उठाये गए सूरह 9 आयत 5 पर  उत्तर ~जिस सूरह  तौबा 9/आयत 5 ज़िक़्र किया जाता है  वह इस तरह है की यह सूरह तब नाज़िल हुई जब मुसलमानों और मक्का के मुशरिकों(बहुदेवावादियों) के बीच हुई संधी को मक्का के मुशरिकों ने तोड दिया और मुसलमानों पर आक्रमण का प्रपंच रचनें लगे.मुसलमानो पर जुल्म करने लगे मुसलमानो को उनके घरो से निकालने लगे तब अल्लाह ने यह सूरह नाज़िल की और उन मुशरिको को, जिन्हों ने संधी तोड़ी थी, को 4 महीने का समय दिया. अगर इन चार महीनों में यह सीधे रास्ते पर नहीं आते हैं तो इन से जंग करो और जंग के समय में, जंग मे...

काबा पूजा।

गुलशन पाहुजा जी  प्रश्न: क्या मुस्लिम काबा का पूजा करते है  उत्तर : ‘काबा’ किबला है अर्थात् वह दिशा जिधर मुसलमान नमाज़ के समय अपने चेहरे का रुख़ करते हैं। यह बात सामने रहनी चाहिए कि यद्यपि मुसलमान अपनी नमाज़ों में काबा की तरफ़ अपना रुख़ करते हैं लेकिन वे काबा की पूजा नहीं करते। मुसलमान एक अल्लाह के सिवा किसी की पूजा नहीं करते और न ही किसी के सामने झुकते हैं। क़ुरआन में कहा गया है— ‘‘हम तुम्हारे चेहरों को आसमान की ओर उलटते-पलटते देखते हैं। तो क्या हम तुम्हारे चेहरों को एक किब्ले की तरफ़ न मोड़ दें, जो तुम्हें प्रसन्न कर दे। तुम्हें चाहिए कि तुम जहाँ कहीं भी रहो अपने चेहरों को उस पवित्र मस्जिद की तरफ़ मोड़ लिया करो।’’ (क़ुरआन, 2:144) 1. इस्लाम एकता की बुनियादों को मज़बूत करने में विश्वास करता है नमाज़ पढ़ते वक़्त यह संभव था कि कुछ लोग उत्तर की ओर अपना रुख़ करते और कुछ दक्षिण की ओर। एक मात्र वास्तविक स्वामी की इबादत में मुसलमानों को संगठित करने के लिए यह आदेश दिया कि चाहे वे जहाँ कहीं भी हों, वे अपने चेहरे एक ही दिशा की ओर करें अर्थात् काबा की ओर। यदि कुछ मुसलमान ‘काबा’ के पश्चिम...

पृथ्वी शेषनाग पर

Pramod Babu आप जानते भी हो की एक हेल्थी चर्चा (debate ) कैसे की जाती है  चर्चा का अर्थ सवालो से मुह चुरा कर भागना और खुद एक के बाद एक सिर्फ सवाल करना नही होता है बल्कि सवालो का जवाब भी देना होता है तर्क दलील पर गौर करना तर्क दलील रेफरेंस से बात करना होता है   Sorry for that but मजबूरी में मुझे आप से बोलना पढ़ रहा है की आप मेरे साला नही हो जो आप एक के बाद एक सवाल करते रहो और मैं जवाब देता राहु और आप खुद जवाबो से मुह चुरा कर भागते रहो  वह दिन गया जब हम सिर्फ जवाब दिया करते थे अब जवाब देने के साथ साथ सवाल भी होगा  अब आते है मुद्दे पर मेरे तरफ से जवाब तो तब बनती जब आप कुरआन से धरती को चपटी साबित करते फिर भी मैंने रेफरेंस के साथ जवाब दिया और साबित किया की कुरआन अनुसार धरती चपटी नही बल्कि नारंगी या सुतुर्मुर्ग के अंडे जैसा गोल है   लेकिन आप है की  पृथ्वी को शेषनाग के फन पर ही छोड़ कर दूसरा सवाल करने लगे  पहले आप जवाब दे कर पृथ्वी को शेषनाग के फन से उतारो और कुरआन से धरती चपटी साबित करो जैसे मैं आप के ग्रंथो महाभारत पुराणों से पृथ्वी को शेषनाग के फन प...

बीवी को पीटना

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Pramod Babu   पहले मै आप से पूछना चाहता हु  अगर आप अपनी पत्नी में सरकशी देखोगे यानि आप की पत्नी बेवफाई पे उतर जाते बदचलनी करने लगे और आप के समझाने से भी नही माने तो आप अपनी पत्नी को सुधारने के लिए क्या रास्ता अपनाओगे ? या फिर बाकियो की तरह बिना समझाये बुरी तरह पिटोगे या घर से निकाल दोगे या कुछ लोग जला कर मार् देते है वैसे ही आप भी मार दोगे या फिर उसकी मर्ज़ी जो करना है करें बोल कर खामुस रह जाओगे ?  याद रहे चर्चा सभ्यतापूर्ण तर्क दलील रेफरेंस से करना  जो मैं रेफरेंस दिया हु या सवाल किया हु उसका जवाब सभ्यतापूर्ण देना अपने घर समाज की संस्कार यहाँ न दिखाना  खैर चलते है सवाल और जवाब के तरफ  प्र्शन-  क्या इस्लाम बीवी को मारने का हुक्म देता है? Wife Beating in Islam ? उत्तर- यह झूठ के सहारे फैलाई गई एक झूठी अफवाह एक गलत फहमी है जो कुरआन की उस आयात को गलत तरीके तोड़ मरोड़ कर पेश  किया जाता अनजान लोगो में भर्म फैलाया जाता है  असल बात ये नहीं कि शोहर जब चाहे किसी भी बात पर बीवी को मार सकता है बल्कि कुरआन में यह पूरी बात देखें तो वहां मामला ही कुछ और ...

इस्लाम व सनातन

इस्लाम आ चुका है आपके जीवन में Islam means एक  भाई Mukesh Sharma जी ने घोषित कर दिया कि इस्लाम हिंदू धर्म की छाया प्रति है। आज कहना सबके लिए आसान हो गया है। इसीलिए कोई कुछ भी कह सकता है। अगर कुछ साधारण सी बातों पर भी विचार कर लिया जाए तो उन्हें अपनी ग़लती आसानी से समझ में आ सकती है और अगर वे न समझें तब भी कम से कम दूसरों की समझ में तो आ ही जाएगी। 1. हिंदू धर्म की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा आज तक तय नहीं है जबकि इस्लाम की परिभाषा तय है। 2. हिंदू भाई बहनों के लिए कर्तव्य और अकर्तव्य कुछ भी निश्चित नहीं है। एक आदमी अंडा तक नहीं छूता और अघोरी इंसान की लाश खाते हैं जबकि दोनों ही हिंदू हैं। जबकि एक मुसलमान के लिए भोजन में हलाल हराम निश्चित है। 3. हिंदू मर्द औरत के लिए यह निश्चित नहीं है कि वे अपने शरीर को कितना ढकें ?, एक अपना शरीर ढकता है और दूसरा पूरा नंगा ही घूमता है। जबकि मुस्लिम मर्द औरत के लिए यह निश्चित है कि वे अपने शरीर का कितना अंग ढकें ? 4. हिंदू के लिए उपासना करना अनिवार्य नहीं है बल्कि ईश्वर के अस्तित्व को नकारने के बाद भी लोग हिंदू कहलाते हैं। जबकि मुसलमान के लिए इबादत करना अ...

स्मृतियां

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Awhad Zaki भाई हमारे टनाटन की खूबसूरती  जिसे हम टनाटनीयो के इलावा ये म्लेच्छ दस्यु कभी नही समझ पाएंगे 😕😐 भर्तारं लंघयेद्या तु स्त्री ज्ञातिगुणदर्पिता । तां श्वभिः खादयेद्राजा संस्थाने बहुसंस्थिते ।। -मनु स्मृति, 8, 371 जो स्त्री अपने पैतृक धन और रूप के अहंकार से पर पुरूष सेवन और अपने पति का तिरस्कार करे उसे  कुत्तों से नुचवा दे। ●●●● Awhad Zaki भाई इन सवालो का जवाब दे कर आप Gulshan HK Sweeti Riya Hamid Khan Shah Lucknowi Asia G. जैसे म्लेच्छ का मुह बन्द कर दो वर्ना ये लोग हम मुह से पैदा होने वाले श्रेष्ठो को मात्र मूत्र पिने और गोबर खाने वाला whatsapp University का छात्र समझेंगे 😐😐 #मनुषमृति_में_औरत_की_स्तिथि_उनके_साथ_बेवहार  #और_उनका_अधिकार   मनुषमृति अनुसार  1 पति पत्नी को बेच सकता है त्याग सकता है लेकिन फिर भी पत्नी को उसी का पत्नी बन कर रहना है  2,स्त्री को आज़ादी नही देना चाहिए उन्हें अपने बस में रखें  3,स्त्री स्वतन्त्रा के योग्य नही है  4,स्त्री दोनों कुलो को कलंकित करती है  5, स्त्रियाँ रूप की परीक्षा नहीं करतीं हैं, न तो अवस्...