इस्लाम मे शराब

जब भी शराब को गलत कहा जाता हैं या शराब गाज़ा भांग जैसे नशे को हराम बताया जाता है तो कुछ हमारे  गैर मुस्लिम भाई हम पर  तंज़ मारते हैं और कहते है  अल्लाह जो जन्नत में शराब देगा  उसका  क्या”
कुछ लोग ऐसा अपने अज्ञानता के कारण और भाषा की सही ज्ञान ना होने के कारण बोलते है  तो कुछ लोग जान बूझ कर अपनी हठधर्मी के कारण या फिर सुनी सुनाई बातो के कारण बोलते है। 
Ratan Vishwakarma ji भाई शराब दुनिया में भी हराम और जन्नत में भी हराम है

उत्तर~सबसे पहले ये विश्लेषण करना जरुरी है के कुरआन  में अल्लाह  ने दुनिया में शराब को क्यों हराम (वर्जित) किया है और क्या जन्नत में इसी शराब को पिलाने का वादा  किया है ??

जन्नत उन ईमान वालो अल्लाह परमेश्वर में विश्वाश रखने वालो के लिए हैं जो दुनिया में अपनी ज़िन्दगी अल्लाह परमेश्वर के हुक्म और फरमाबरदारी में गुजारते हैं और अपने रब के द्वारा मिलने वाली नेमतों पर विश्वाश रखते हैं वो हर बुरे काम से बचते हैं अच्छाई के रास्तो पर चलते है अच्छाई की दावत देते है वो जानते हैं उनका रब इसका बेहतर बदला इस दुनिया के बाद वाली ज़िन्दगी में देगा जिसका उन्होंने वादा किया हुआ है !

अल्लाह परमेश्वर ने ईमान वालों को जन्नत में दुनिया से बेहतर नेमतें देने का वादा किया है जैसे की कुरआन में आया है 

और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छा कर्म किए हम उनसे उनकी बुराइयों को दूर कर देंगे और उन्हें अवश्य ही उसका प्रतिदान प्रदान करेंगे, जो कुछ अच्छे कर्म वे करते रहे होंगे
( सूरह:29 आयत:7)

जब बेहतर देने का वादा किया है तो फिर दुनिया वाली शराब जन्नत की शराब केसे हो सकती है ??

आइये जानते हैं अल्लाह ने दुनिया की शराब के बारे में कुरआन में क्या फरमाया है 

*یَسۡئَلُوۡنَکَ عَنِ الۡخَمۡرِ وَ الۡمَیۡسِرِؕ قُلۡ فِیۡہِمَاۤ اِثۡمٌ کَبِیۡرٌ وَّ مَنَافِعُ لِلنَّاسِ ۫ وَ اِثۡمُہُمَاۤ اَکۡبَرُ مِنۡ نَّفۡعِہِمَا ؕ وَ یَسۡئَلُوۡنَکَ مَا ذَا یُنۡفِقُوۡنَ ۬ ؕ قُلِ الۡعَفۡوَؕ کَذٰلِکَ یُبَیِّنُ اللّٰہُ لَکُمُ الۡاٰیٰتِ لَعَلَّکُمۡ تَتَفَکَّرُوۡنَ ﴿۲۱۹﴾ۙ*
ऐ रसूल तुमसे शराब और जुए के विषय में पूछते है। कहो, "उन दोनों चीज़ों में बड़ा गुनाह है, यद्यपि लोगों के लिए कुछ फ़ायदे भी है, परन्तु उनका गुनाह उनके फ़ायदे से कहीं बढकर है
 ( सूरह 2: आयत:219)

  يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِّنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमान लानेवालो! ये शराब और जुआ और बूत और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम हैं। तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो।
(सूरह:5 आयत:90)

  إِنَّمَا يُرِيدُ الشَّيْطَانُ أَن يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَعَنِ الصَّلَاةِ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّنتَهُونَ
शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे,तो क्या तुम बाज़ न आओगे
(सूरह:5 आयत:91)

सुरह माइदा और सुरह बकरा में जिस शराब का (दुनिया की शराब) का ज़िक्र किया जा रहा है उसके लिए अरबिक लफ्ज़ “खम्र” का इस्तेमाल किया गया है जिका मतलब होता है “मादक पैय या शराब
ऊपर की आयतों में शराब को बुरी चीज बताया गाया है और इनसे बचने के लिए कहा गया है साथ ही इन आयतों में शराब (wine) के लिए शब्द “खम्र का इस्तेमाल हुआ है ।

अब जन्नत में मिलने वाली शराब का विश्लेषण करते हैं 

फिर कोई प्राणी नहीं जानता आँखों की जो ठंडक उसके लिए छिपा रखी गई है उसके बदले में देने के ध्येय से जो वे करते रहे होंगे
 (सूरह:32 आयत:17)

यानि जन्नत में इंसानों को जिन इनामत से नवाज़ा जायेगा उसको किसी आँख ने नहीं देखा है और न वो दुनिया के चीजो से मिलती होगी 

तो क्या जो व्यक्ति अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हो वह उन लोगों जैसा हो सकता है, जिन्हें उनका बुरा कर्म ही सुहाना लगता हो और वे अपनी इच्छाओं के पीछे ही चलने लग गए हो?
(सूरह:47 आयत:14

जिस बेहिष्त का परहेज़गारों से वायदा किया जाता है उसकी सिफत ये है कि उसमें पानी की नहरें जिनमें ज़रा बू नहीं और दूध की नहरें हैं जिनका मज़ा तक नहीं बदला और ऐसे पेय की नहरें हैं जो पीने वालों के लिए (सरासर) लज़्ज़त है और साफ़ शफ़्फ़ाफ़ शहद की नहरें हैं और वहाँ उनके लिए हर किस्म के मेवे हैं और उनके परवरदिगार की तरफ से बखि़्षष है (भला ये लोग) उनके बराबर हो सकते हैं जो हमेषा दोज़ख़ में रहेंगे और उनको खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा तो वह आँतों के टुकड़े टुकड़े कर डालेगा (सूरह:47 आयत:15)

  يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ

उनके बीच विशुद्ध पेय का पात्र फिराया जाएगा,
(सूरह:37 आयत:45)
  بَيْضَاءَ لَذَّةٍ لِّلشَّارِبِينَ

बिलकुल साफ़, उज्जवल, पीनेवालों के लिए सर्वथा सुस्वादु। (सूरह:37 आयत:46

  لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ

न उसमें कोई ख़ुमार होगा और न वे उससे निढाल और मदहोश होंगे। (सूरह:37 आयत:47)

इन आयतो में साफ़ तौर पर लिखा है के इसमें किसी प्रकार का नशा नहीं होगा ना ही उसे पीकर कोई नशे में धुत होगा और ना ही अपना होस खो बैठेगा 

आयत नंबर 46 में लफ्ज़ लिसारिबीन” (for the drink) पिने के लिए इस्तेमाल हुआ है जो की  word शर्ब से आया है जिसका अर्थ है पीना (drink)

जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा
 (सूरह:56 आयत:19)

उपरोक्त आयतों का विश्लेषण करने पर यह पता चलता है के सिर्फ कुरआन के अन्दर दुनिया की शराब नाम से ही नहीं बल्कि काम से भी अलग (different) हैं दोनों के मतलब अलग है और दोनों के काम अलग है दुनिया की शराब को पीकर आदमी नशे में धुत हो जाता है अपना होसहवास खो देता है और अपने शारीर में कई तरह की बिमारियों को जन्म देता है मगर जन्नत की शर्ब्स शराब में किसी तरह का कोई नशा नहीं होगा न ही किसी प्रकार की बीमारी होगी
यह दुनिया में सब्र अच्छे कर्मो का बदला होगा

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