पृथ्वी शेषनाग पर

Pramod Babu आप जानते भी हो की एक हेल्थी चर्चा (debate ) कैसे की जाती है 
चर्चा का अर्थ सवालो से मुह चुरा कर भागना और खुद एक के बाद एक सिर्फ सवाल करना नही होता है बल्कि सवालो का जवाब भी देना होता है तर्क दलील पर गौर करना तर्क दलील रेफरेंस से बात करना होता है 

 Sorry for that but मजबूरी में मुझे आप से बोलना पढ़ रहा है की आप मेरे साला नही हो जो आप एक के बाद एक सवाल करते रहो और मैं जवाब देता राहु और आप खुद जवाबो से मुह चुरा कर भागते रहो 
वह दिन गया जब हम सिर्फ जवाब दिया करते थे अब जवाब देने के साथ साथ सवाल भी होगा 

अब आते है मुद्दे पर मेरे तरफ से जवाब तो तब बनती जब आप कुरआन से धरती को चपटी साबित करते फिर भी मैंने रेफरेंस के साथ जवाब दिया और साबित किया की कुरआन अनुसार धरती चपटी नही बल्कि नारंगी या सुतुर्मुर्ग के अंडे जैसा गोल है 

 लेकिन आप है की  पृथ्वी को शेषनाग के फन पर ही छोड़ कर दूसरा सवाल करने लगे 
पहले आप जवाब दे कर पृथ्वी को शेषनाग के फन से उतारो और कुरआन से धरती चपटी साबित करो
जैसे मैं आप के ग्रंथो महाभारत पुराणों से पृथ्वी को शेषनाग के फन पर टिका हुवा साबित किया हु  फिर मैं आप के इस सवाल का भी जवाब दूंगा की 
वृताकार धरती का स्टार्टिंग पॉइंट होना और पेंडिंग पॉइंट होना संभव है ? या नही वैसे पेंडिंग नही एंडिंग होता है 😆
और वेद से पृथ्वी को चौकोर भी साबित करूँगा 

आप जैसे भाई लोग सब जानते समझते है लेकिन खुद जैसे भर्मित है दुसरो को भी भर्मित करना चाहते है अपनी गपोल कथा अपनी पाखण्ड दुसरो के साथ जोड़ना चाहते है 

पृथ्वी और शेषनाग वाली बात" महाभारत में इस प्रकार उल्लेखित है...

"अधॊ महीं गच्छ भुजंगमॊत्तम;
स्वयं तवैषा विवरं प्रदास्यति।
इमां धरां धारयता त्वया हि मे;
महत् परियं शेषकृतं भविष्यति।।"

(महाभारत आदिपर्व के आस्तिक उपपर्व के 36 वें अध्याय का श्लोक )

इसमें ही वर्णन मिलता है कि... शेषनाग को ब्रह्मा जी धरती को धारण करने को कहते हैं... और, क्रमशः आगे के श्लोक में शेषनाग जी आदेश के पालन हेतु पृथ्वी को अपने फन पर धारण कर लेते हैं.

शास्त्रों का ये कहना कि...
शेषनाग के हिलने से भूकंप आता है ल

थोड़ा शेषनाग के बारे में 
महाभारत एवं पुराणों में असुरों की उत्पत्ति एवं वंशावली के वर्णन में कहा गया है की ब्रह्मा के छः मानस पुत्रों में से एक 'मरीचि' थे जिन्होंने अपनी इच्छा से कश्यप नामक प्रजापति पुत्र उत्पन्न किया। कश्यप ने दक्ष प्रजापति की 17 पुत्रियों से विवाह किया। उनमें से एक का नाम कद्रू था जिनसे 1000 बलशाली नाग (सर्प नहीं) पैदा हुए जिसमें सबसे बड़े भगवान् शेषनाग थे। कद्रू के बेटों में सबसे पराक्रमी शेषनाग थे। इनका एक नाम अनन्त भी है।

विनता तथा कद्रु एक बार कहीं बाहर घूमने गयीं। वहाँ उच्चैश्रवा नामक घोड़े को देखकर दोनों की शर्त लग गयी कि जो उसका रंग गलत बतायेगी, वह दूसरी की दासी बनेगी। अगले दिन घोड़े का रंग देखने की बात रही। विनता ने उसका रंग सफेद बताया था तथा कद्रु ने उसका रंग सफेद, पर पूंछ का रंग काला बताया था। कद्रु के मन में कपट था। उसने घर जाते ही अपने पुत्रों को उसकी पूंछ पर लिपटकर काले बालों का रूप धारण करने का आदेश दिया जिससे वह विजयी हो जाय।
शेषनाग का धर्म के प्रति दृढ़ता 
शेषनाग ने जब देखा कि उनकी माता व भाइयों ने मिलकर विनता के साथ छल किया है तो उन्होंने अपनी मां और भाइयों का साथ छोड़कर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करनी आरंभ की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें वरदान दिया कि तुम्हारी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं होगी।
ब्रह्मा ने शेषनाग को यह भी कहा कि यह पृथ्वी निरंतर हिलती-डुलती रहती है, अत: तुम इसे अपने फन पर इस प्रकार धारण करो कि यह स्थिर हो जाए। इस प्रकार शेषनाग ने संपूर्ण पृथ्वी को अपने फन पर धारण कर लिया।

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