बीवी को पीटना
Pramod Babu
पहले मै आप से पूछना चाहता हु अगर आप अपनी पत्नी में सरकशी देखोगे यानि आप की पत्नी बेवफाई पे उतर जाते बदचलनी करने लगे और आप के समझाने से भी नही माने तो आप अपनी पत्नी को सुधारने के लिए क्या रास्ता अपनाओगे ?
या फिर बाकियो की तरह बिना समझाये बुरी तरह पिटोगे या घर से निकाल दोगे या कुछ लोग जला कर मार् देते है वैसे ही आप भी मार दोगे या फिर उसकी मर्ज़ी जो करना है करें बोल कर खामुस रह जाओगे ?
याद रहे चर्चा सभ्यतापूर्ण तर्क दलील रेफरेंस से करना
जो मैं रेफरेंस दिया हु या सवाल किया हु उसका जवाब सभ्यतापूर्ण देना अपने घर समाज की संस्कार यहाँ न दिखाना
खैर चलते है सवाल और जवाब के तरफ
प्र्शन- क्या इस्लाम बीवी को मारने का हुक्म देता है? Wife Beating in Islam ?
उत्तर- यह झूठ के सहारे फैलाई गई एक झूठी अफवाह एक गलत फहमी है जो कुरआन की उस आयात को गलत तरीके तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाता अनजान लोगो में भर्म फैलाया जाता है
असल बात ये नहीं कि शोहर जब चाहे किसी भी बात पर बीवी को मार सकता है बल्कि कुरआन में यह पूरी बात देखें तो वहां मामला ही कुछ और है।
यह कुरआन की (सूरह 4:आयत:34)इसमें पूरी बात यह लिखी है कि अगर तुम बीवी में सरकशी देखो यानि अगर बीवी बेवफ़ाई पर उतर आए या बगावत करे या अपनी कोई जिम्मेदारी जो इस्लाम ने उसपर बीवी की हैसियत से डाली है निभाने से इनकार करे यानि तलाक भी ना मांग रही हो और बीवी की तरह भी रहने के लिए तैयार ना हो जिसके नतीजे में घर का निज़ाम ना चल सकता हो तो कुरआन ने शोहर को मशवरा दिया कि उन्हें सीधे तलाक ना दो बल्कि घर बचाने की कोशिश इस तरह करो कि पहले उसे समझाओ! ज़ाहिर है समझाने के भी कई तरीके होते हैं पहले शोहर खुद समझाएगा उससे बात ना बनी तो अपने बड़ों को, अपने घर के शुभचिंतकों को और बीवी के घर वालों को साथ में ला कर भी समझाने की कोशिश करेगा!
इसके बाद भी अगर समझाने में कामयाबी नहीं मिली तो कुरआन ने कहा है कि बीवी से अपना बिस्तर अलग कर दो! यानि बहुत ज़्यादा नाराज़गी का इज़हार करो शायद इस से वो बाज़ आजाए! इसके बाद भी अगर बात नहीं बनी तो उसे सही रास्ते पर लाने के लिए हलकी मार मार सकते हो! जिसे हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया कि इतना ज़ोर से ना मारो कि निशान वगैरा हो जाए (सही मुस्लिम 2950) और मूह पर मारने से भी आप ने माना फ़रमाया!
अल-हसन अल-बसरी ने कहा: "इसका मतलब है कि इससे दर्द नहीं होना चाहिए।"
अता ने कहा: मैंने इब्न अब्बास से कहा, ऐसी कौन सी मार है जो कठोर नहीं है? उसने कहा, मिसवाक वगैरह से मारना। मिसवाक एक छोटी टहनी है जिसका उपयोग दांत साफ करने के लिए किया जाता है - अनुवादक
इसके पीछे का उद्देश्य महिला को चोट पहुंचाना या अपमानित करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उसे यह एहसास दिलाना है कि उसने अपने पति के अधिकारों का उल्लंघन किया है, और उसके पति को उसे सही ठहराने और उसे अनुशासित करने का अधिकार है।
यह शोहर के हक की आखरी हद है इससे आगे उसे कोई कदम उठाने का हक नहीं, फिर बस तलाक ही आखरी रास्ता है! लेकिन अगर इससे बात बन जाए तो इसी आयत में आगे अल्लाह ने फ़रमाया है कि फिर बीवी को बिलकुल माफ़ कर दो और उससे बदला लेने के बहाने तलाश ना करो! यहाँ देखें
पति पत्नियों संरक्षक और निगराँ है, क्योंकि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ के मुक़ाबले में आगे रहा है, तो नेक पत्ऩियाँ तो आज्ञापालन करनेवाली होती है और गुप्त बातों की रक्षा करती है, क्योंकि अल्लाह ने उनकी रक्षा की है। और जो पत्नियों ऐसी हो जिनकी सरकशी का तुम्हें भय हो, उन्हें समझाओ और बिस्तरों में उन्हें अकेली छोड़ दो और (अति आवश्यक हो तो) उन्हें मारो भी। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानने लगे, तो उनके विरुद्ध कोई रास्ता न ढूढ़ो। अल्लाह सबसे उच्च, सबसे बड़ा है । सूरह 4: आयत 34
याद रहे यह हक भी सिर्फ एक कंडीशन में हर औरत के लिए नही बल्कि एक मुजरिम औरत के लिए दिया गया है जब शोहर तलाक देने से बचना चाहता हो और कोशिश करना चाहता हो कि किसी तरह मेरा परिवार बच जाए! बीवी से बदला लेने के लिए या उसे सज़ा देने या चोट पहुचाने के लिए यह नियम बिलकुल नहीं है! बल्कि उस मुजरिम औरत को सुधारने के लिए अपना घर परिवार बचाने के लिए है
और अगर वह औरत सुधर जाती है तो अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है की उसके विरुद्ध कोई रास्ता न तलासो
इस पर सवाल किया जा सकता है कि अगर शोहर अपने फ़र्ज़ ना निभा रहा हो तो क्या बीवी को भी उसे सीधे रास्ते पर लाने के लिए ऐसे ही सब शोहर के साथ करने का हक है ?
तो जी हाँ बीवी उसे समझाएगी, बड़ों को भी बीच में लाएगी, नाराज़गी का इज़हार भी हर तरह से करेगी लेकिन वो शोहर को मार नहीं सकती! और मार इसलिए नहीं सकती क्यों कि वो रिश्ते में बीवी से बड़ा है! जैसे बड़ा भाई बड़ी बहन चाचा ताया या बाप का रिश्ता बेटे से बड़ा होता है इसी लिए बाप हज़ार गलती करे लेकिन बेटे को उस पर हाथ उठाने का हक नहीं है, बाकि वो बाप को सही राह पर लाने के सब तरीके आज़माए गा! लेकिन अगर उसने हाथ उठा दिया तो यह उसके रिश्ते की तौहीन होगी इसी तरह अगर बीवी को भी हाथ उठाने का हक दिया जाए तो फिर शोहर का रिश्ता बड़ा कहाँ रहा
Example के तौर पर एक स्कुल है उसमे कई सारे टीचर होते है लेकिन प्रिंसपल एक होते है अगर कोई टीचर गलती करता है तो प्रिंसपल टीचर को डिसमिस कर सकता है लेकिन प्रिंसपल की गलती होने पर कोई टीचर प्रिंसपल को डिसमिस नही कर सकता हा प्रिंसपल की शिकायत जरूर कर सकता है इससे टीचर की औदे में कोई कमी नही होती है
दूसरी बात अगर बीबी शौहर पर हाथ उठाएगी तो यह उसके लिए और मुसीबत बन जायेगा क्यों की औरत मर्द से सक ना सकेगी
और घर परिवार समाज के नज़र में भी बुरी बन जायेगी
क़ुरआन की नसीहत : औरतों के साथ किस तरह पेश आना चाहिए ?
क़ुरआन में अल्लाह ( ईश्वर) ने फ़र्माया है
तुम औरतों के साथ हुस्ने सुलूक से ज़िन्दगी गुज़ारो और अगर तुम को उन की ( कोई आदत ) अच्छी न लगे ( तो उस की वजह से सख्ती का बर्ताव न किया करो बल्कि उस पर सब्र करो )
क्योंकि , मुमकिन है तुम किसी चीज़ को ना पसंद करो , मगर अल्लाह ने उस में बहुत ज़ियादा भलाई रख दी हो ।(सूरह निसा 4: आयत:19)
आप प्यारे नबी ए करीम सल्ल
लल्लाहु अलैहे वैसल्लम ने फरमाया है की तुम मे से बेहतरिन शख्स वो है जो अपनी बीवी से अच्छा
सलुक करे । ( मिश्कात सफा 282)
Parmod babu जैसे भाई लोग जानते समझते तो सब है लेकिन अपनी गन्दगी इस्लाम पर डाल कर ये इस्लाम को भी अपने जैसा साबित करने की नाकाम कोसिस करते है
अब यहाँ पढ़े
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अगर औरत सेक्स के लिए तैयार न हो या सेक्स के लिए मना करें तो पति उसे इच्छाअनुसार दण्ड का भय दिखा कर उसके साथ बलपूर्वक समागन यानि सेक्स करे (बृहद्कारण्य उपनिषद 6/4/7)
शंकराचार्य भाष्य में लात घुसे डंडो से भी मारने का जिक्र है
मनुषमृति में औरत को कुत्ते से नोचवाने को कहा गया है
भर्तारं लंघयेद्या तु स्त्री ज्ञातिगुणदर्पिता ।
तां श्वभिः खादयेद्राजा संस्थाने बहुसंस्थिते ।।
-मनु स्मृति, 8, 371
जो स्त्री अपने पैतृक धन और रूप के अहंकार से पर पुरूष सेवन और अपने पति का तिरस्कार करे उसे कुत्तों से नुचवा दे।।
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Nasr Skeptic पहले मै आप से पूछना चाहता हु अगर आप अपनी पत्नी में सरकशी देखोगे यानि आप की पत्नी बेवफाई पे उतर जाते बदचलनी करने लगे और आप के समझाने से भी नही माने तो आप अपनी पत्नी को सुधारने के लिए क्या रास्ता अपनाओगे ?
या फिर बाकियो की तरह बिना समझाये बुरी तरह पिटोगे या घर से निकाल दोगे या कुछ लोग जला कर मार् देते है वैसे ही आप भी मार दोगे या फिर उसकी मर्ज़ी जो करना है करें बोल कर खामुस रह जाओगे ?
खैर चलते है सवाल और जवाब के तरफ
प्र्शन- क्या इस्लाम बीवी को मारने का हुक्म देता है? Wife Beating in Islam ?
उत्तर- यह झूठ के सहारे फैलाई गई एक झूठी अफवाह एक गलत फहमी है जो कुरआन की उस आयात को गलत तरीके तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाता अनजान लोगो में भर्म फैलाया जाता है
असल बात ये नहीं कि शोहर जब चाहे किसी भी बात पर बीवी को मार सकता है बल्कि कुरआन में यह पूरी बात देखें तो वहां मामला ही कुछ और है।
यह कुरआन की (सूरह 4:आयत:34)इसमें पूरी बात यह लिखी है कि अगर तुम बीवी में सरकशी देखो यानि अगर बीवी बेवफ़ाई पर उतर आए या बगावत करे या अपनी कोई जिम्मेदारी जो इस्लाम ने उसपर बीवी की हैसियत से डाली है निभाने से इनकार करे यानि तलाक भी ना मांग रही हो और बीवी की तरह भी रहने के लिए तैयार ना हो जिसके नतीजे में घर का निज़ाम ना चल सकता हो तो कुरआन ने शोहर को मशवरा दिया कि उन्हें सीधे तलाक ना दो बल्कि घर बचाने की कोशिश इस तरह करो कि पहले उसे समझाओ! ज़ाहिर है समझाने के भी कई तरीके होते हैं पहले शोहर खुद समझाएगा उससे बात ना बनी तो अपने बड़ों को, अपने घर के शुभचिंतकों को और बीवी के घर वालों को साथ में ला कर भी समझाने की कोशिश करेगा!
इसके बाद भी अगर समझाने में कामयाबी नहीं मिली तो कुरआन ने कहा है कि बीवी से अपना बिस्तर अलग कर दो! यानि बहुत ज़्यादा नाराज़गी का इज़हार करो शायद इस से वो बाज़ आजाए! इसके बाद भी अगर बात नहीं बनी तो उसे सही रास्ते पर लाने के लिए हलकी मार मार सकते हो! जिसे हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया कि इतना ज़ोर से ना मारो कि निशान वगैरा हो जाए (सही मुस्लिम 2950) और मूह पर मारने से भी आप ने माना फ़रमाया!
यह शोहर के हक की आखरी हद है इससे आगे उसे कोई कदम उठाने का हक नहीं, फिर बस तलाक ही आखरी रास्ता है! लेकिन अगर इससे बात बन जाए तो इसी आयत में आगे अल्लाह ने फ़रमाया है कि फिर बीवी को बिलकुल माफ़ कर दो और उससे बदला लेने के बहाने तलाश ना करो! यहाँ देखें
पति पत्नियों संरक्षक और निगराँ है, क्योंकि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ के मुक़ाबले में आगे रहा है, तो नेक पत्ऩियाँ तो आज्ञापालन करनेवाली होती है और गुप्त बातों की रक्षा करती है, क्योंकि अल्लाह ने उनकी रक्षा की है। और जो पत्नियों ऐसी हो जिनकी सरकशी का तुम्हें भय हो, उन्हें समझाओ और बिस्तरों में उन्हें अकेली छोड़ दो और (अति आवश्यक हो तो) उन्हें मारो भी। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानने लगे, तो उनके विरुद्ध कोई रास्ता न ढूढ़ो। अल्लाह सबसे उच्च, सबसे बड़ा है । सूरह 4: आयत 34
याद रखये यह हक भी सिर्फ एक कंडीशन में दिया गया है जब शोहर तलाक देने से बचना चाहता हो और कोशिश करना चाहता हो कि किसी तरह मेरा परिवार बच जाए! बीवी से बदला लेने के लिए या उसे सज़ा देने के लिए यह नियम बिलकुल नहीं है! और ध्यान रहे इस हाथ उठाने का मतलब भी ज़ुल्म करना नहीं है अगर शोहर ने ऐसे मारा जिसे ज़ुल्म कहते हैं तो फिर वो क़ानूनी सज़ा का हकदार हो जाएगा!
इस पर सवाल किया जा सकता है कि अगर शोहर अपने फ़र्ज़ ना निभा रहा हो तो क्या बीवी को भी उसे सीधे रास्ते पर लाने के लिए ऐसे ही सब शोहर के साथ करने का हक है ?
तो जी हाँ बीवी उसे समझाएगी, बड़ों को भी बीच में लाएगी, नाराज़गी का इज़हार भी हर तरह से करेगी लेकिन वो शोहर को मार नहीं सकती! और मार इसलिए नहीं सकती क्यों कि वो रिश्ते में बीवी से बड़ा है! जैसे बड़ा भाई बड़ी बहन चाचा ताया या बाप का रिश्ता बेटे से बड़ा होता है इसी लिए बाप हज़ार गलती करे लेकिन बेटे को उस पर हाथ उठाने का हक नहीं है, बाकि वो बाप को सही राह पर लाने के सब तरीके आज़माए गा! लेकिन अगर उसने हाथ उठा दिया तो यह उसके रिश्ते की तौहीन होगी इसी तरह अगर बीवी को भी हाथ उठाने का हक दिया जाए तो फिर शोहर का रिश्ता बड़ा कहाँ रहा
दूसरी बात अगर बीबी शौहर पर हाथ उठाएगी तो यह उसके लिए और मुसीबत बन जायेगा क्यों की औरत मर्द से सक ना सकेगी
और घर परिवार समाज के नज़र में भी बुरी बन जायेगी
क़ुरआन की नसीहत : औरतों के साथ किस तरह पेश आना चाहिए ?
क़ुरआन में अल्लाह ( ईश्वर) ने फ़र्माया है
तुम औरतों के साथ हुस्ने सुलूक से ज़िन्दगी गुज़ारो और अगर तुम को उन की ( कोई आदत ) अच्छी न लगे ( तो उस की वजह से सख्ती का बर्ताव न किया करो बल्कि उस पर सब्र करो )
क्योंकि , मुमकिन है तुम किसी चीज़ को ना पसंद करो , मगर अल्लाह ने उस में बहुत ज़ियादा भलाई रख दी हो ।(सूरह निसा 4: आयत11)
आप प्यारे नबी ए करीम सल्ल
लल्लाहु अलैहे वैसल्लम ने फरमाया है की तुम मे से बेहतरिन शख्स वो है जो अपनी बीवी से अच्छा
सलुक करे । ( मिश्कात सफा 282)
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