सुरः तौबा
आज कल एक ट्रेड चला है ex muslim बन कर लोगो को भर्मित करने का लेकिन जब इनसे सवाल किया जाता है की क्या आप यह एक्सेप्ट करते हो की आप किसी मुस्लिम का ही औलाद हो किसी मुस्लिम के वीर्य से ही पैदा हुवे हो तो इनका कोई जवाब नही आता है बल्कि अपनी असल संस्कार दिखाने लगते है पोस्ट से तो ये भाई पूरी तरह नफरती संघी मानसिक्ता वाले लग रहे है लेकिन मुस्लिमो को अपना बाप बनाना भी तो जरुरी है क्यों की मुस्लिम इस्लाम के बिना तो इनकी ना सुबह होती है न साम खैर अब चलते है इनके द्वारा उठाये गए सूरह 9 आयत 5 पर उत्तर ~जिस सूरह तौबा 9/आयत 5 ज़िक़्र किया जाता है वह इस तरह है की यह सूरह तब नाज़िल हुई जब मुसलमानों और मक्का के मुशरिकों(बहुदेवावादियों) के बीच हुई संधी को मक्का के मुशरिकों ने तोड दिया और मुसलमानों पर आक्रमण का प्रपंच रचनें लगे.मुसलमानो पर जुल्म करने लगे मुसलमानो को उनके घरो से निकालने लगे तब अल्लाह ने यह सूरह नाज़िल की और उन मुशरिको को, जिन्हों ने संधी तोड़ी थी, को 4 महीने का समय दिया. अगर इन चार महीनों में यह सीधे रास्ते पर नहीं आते हैं तो इन से जंग करो और जंग के समय में, जंग मे...
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